Sunday, December 13, 2020

फ़िदा

फ़िदा पर वक़्त का तकाज़ा ऐसा, उल्फत में विदा लेते अरमान सुलगते हैं...

नाम पूछो तो ना मालूम बता ये फितरत छुपाये, पर अंजुमन अरमानो की सिमटते नहीं बनती ...

 

प्रशांत माथुर 14  Dec 2020 


Though devoted but time is such, all the departing wishes I have are burning..

When asked her name, concealing my desire, but Congregation of these wishes are not thinning.. 

Saturday, December 12, 2020

अर्ज़ है

अर्ज़ है ये नज़्म, तेरे दर पर गुस्ताख़ दस्तक की तरह.. 

फ़र्ज़ है तेरा की पूछे, कौन आया है... 


प्रशांत माथुर , 12  Dec 2020 

Tuesday, December 8, 2020

दिल और अरमां ...

दिल आज़ाद है अरमां बनाने को, पर कैद भी दिल ही रखता है.. 

है कैद चाहे अरमान कितना भी, पर दिल बहलाये भी यही रखता है.. 


प्रशांत माथुर, 8 Dec 2020

Monday, December 7, 2020

न पूछो..

 हर अरमान ऐसा की तरजीह बताये कैसे दिल, न पूछो.. 

यहाँ भी जन्नत वहा भी जन्नत, फिर मौत क्यों कब आये , न पूछो.. 


प्रशांत माथुर, 8 Dec 2020 

मुस्कुराने की वजह..

 मुस्कुराने की वजह न हो, तो ज़िन्दगी मुश्किल है.. 

कोशिश कर, दुःख में भी मुस्कुराने की वजह मिलना मुमकिन है... 

-प्रशांत माथुर 7 Dec 2020

Saturday, December 5, 2020

चलना था कुछ कदम ..

चलना था कुछ कदम और मंज़िल भी मुंतजऱ थी.. 
पर आसमान की ख्वाइशे ऐसी की सितारे गिनते रह गए.. 

 प्रशांत माथुर, 5 Dec 2020

Wednesday, December 2, 2020

dafn muhabbat

Muhabbat ka ye haal hai jo na-layak hai iske, jo is sanjidagi ke, is nazuk se ahsaas ke, ye dil bas kar baithta hai mohabbat unse.. 

Khabar unko bhi kaha ye bad badhisab hai hamari majburi ka, wo kisi aur se ham bandhe kisi aur se fir bhi na jane kab kar baithe.. 

Dil me jo dard hai, ye mayusi hai chehare par tu bata chupau kaise, Najayaz hai jo nigah-e-duniya me, dabhi chupi hai is dil ke gehere me, wo mohabbat izhar karu to kaise.. 

Hansil nahi koi, manjil nahi jis safar ki koi, aur chor nahi jis tane bane ka, bas yahi justazu meri, uljhan meri, bas yahi mohabbat hai meri.. 

Na koi puch le, na koi jaan le, na koi sanwal leke, launga kya jawab, bas majboor is fard ko kinare se, chupe huye kone me, dil me khud dafn rehne do.. 

Prashant, 3rd Dec 2020

Monday, November 2, 2020

नाउम्मीदगी

नाउम्मीदगी के साये है, घेरे हर ओर रह रह कर आते है.. मुकम्मल हाथ नहीं दीखते की थाम ले, बिला वजह बस रह रह कर ख्याल तेरे आते है.. प्रशांत माथुर 2 Nov 2020

Thursday, October 8, 2020

तेरी याद आती है

नहीं तेरी मुसीबत, तू तो अपने ख्याल और दुनिया में मसरूफ रहती है.. यहाँ हाल ऐसा है की हर कोशिश नाकाम रह रह कर तेरी याद आती है.. प्रशांत माथुर 8 Oct 2020

Sunday, July 26, 2020

न तुम उस पार न में इस पार

न तुम उस पार न में इस पार, न सिर्फ मुझे जो फांसला था दरम्यान उसको भी है तेरा इंतेज़ार
पैमाने ही नहीं जाम को भी, जो हसरते थी साकी, वो भी मुन्तज़िर , बरक़रार नहीं बेक़रार है अब तेरे दीदार की ये प्यास..
-प्रशांत 27 July 2020

तुम संग या तुम बिन

तुम संग या तुम बिन, ये तल्ख़ सवाल न पूछो..
गुज़र रही है यादो के संग बस हाल न पूछो..

प्रशांत  27 जुलाई 2020

Tuesday, June 16, 2020

कुछ रिश्ता ये ऐसा बन रहा है

कुछ रिश्ता ये ऐसा बन रहा है तेरे मेरे बीच, में हैरान हु इसकी रफ़्तार से...
मुस्तक़बिल नहीं बनता कोई तेरे मेरे बीच..फिर भी शिकवा रहेगा तेरी रुस्वाई से...
कोई मंजिल नज़र आती नहीं, और ये सफर न हो ख़तम , है अजीब फिर भी गुरेज़ नहीं ऐसी ख्वाइश से...
देखता हु तुझे हसरत भर कर, कभी आह भर कर, दर्द से सना ये राज़ जज़्ब फिर भी करता हु मुस्कराहट से...
न जाने कैसी एक तरफ़ा मुहब्बत है, बेमुरव्वत सी लगती है, बस अर्ज़ है काबू में रहे ज़ज्बात इस दिल-ऐ-नादाँ से..

-प्रशांत 17 Jun 2020

जब सलाह तुझे करता हु

न पूछ दिल गुरेज़ी का मेरे जब सलाह तुझे करता हु,सोचता हु जितना बहुत कम बयां करता हु..

यो रोकता हु खुद को की हर लफ्ज़ पर तेरी उम्मीद है मुझसे, और कोई खता न मुझसे हो जाये बस ये ख्याल रखता हु..
कुछ बन रहा है रिश्ता तुझ से ऐसा, न कोई मंज़िल न कोई मुस्तकबिल नहीं यहाँ,  पर कुछ ऐसा है की फिर भी तेरी फ़िक्र करता हु..
दिन कुछ ऐसे गुजर जाता है पेशोपश में की किस किरदार में तुझसे मुलाकात करू, बस खुद बनके तुझसे बात करू हर वो मौका तलाश करता हु..
कुछ शुरू किये राब्ते तुझसे , पेशकश की वो सिलसिले बन जाये, उन सिलसिलो के हे बस नए आयाम बनाया करता हु..
चाहत है कुछ इस तरह की के में खुद उलझन में हु, सही गलत के बेनतीजा ताने बाने है बस उन्ही में गुज़र कुछ छोर ढूंढा करता हु.. 

चाहे दूर हे चली जाये तू और मेरी हसरते अधूरी रह जाये.. पर जहा तेरी राह मुक्कमल हो बस वही सलाह करता हु..

-प्रशांत  17 Jun 2020

Wednesday, June 10, 2020

राब्ता

तुझसे कुछ राब्ता है ऐसा की, हसरत हैं बहुत, पर बयां नहीं होती..
बोलने को तुझसे लफ्ज़ बहुत है फुर्सत भी है बहुत, पर जुर्रत नहीं होती..
-प्रशांत 11 Jun 2020

Sunday, June 7, 2020

आज शाम चाँद नहीं निकला...

कुछ मौसम इस तरह, की कल  शाम चाँद नहीं निकला, में मुंतज़र बहुत देर,
कुछ नाराज़ है ये दिल, पर तेरी खता माफ़, कल  तू नहीं निकली , आज  में नहीं निकला..

-प्रशांत 7th Jun 2020

Thursday, June 4, 2020

इस पार में वो उस पार

इस पार में वो उस पार, दरम्यान कुछ नहीं बस एक खुशनुमा अहसास
जाम दर जाम होते रहे ख़तम, न हुई तो बस तेरे दीदार की ये प्यास....
-प्रशांत 
4th June 2020

Wednesday, June 3, 2020

ज़िन्दगी...

यु तलाश ज़िन्दगी तेरी करते रहे.. भूल ही  गए की तुझे ही जीते हैं रहे..
यु मुक्कमल जिंदगी तुझे करते रहे.. भूल ही गए की  मुक्कमल खुद ही होते हैं रहे..
-प्रशांत
4th June 2020

Tuesday, June 2, 2020

तुझसे नज़दीकियाँ....

तुझसे नज़दीकियाँ.... 

कदम उठे उस राह जहा तेरे कदमो के निशा मिले..अब निशा न रहे पर फ़िज़ा में तेरी खुशबु सी आने लगी है..
खो गई तुझ तक राहे पर खुश है दिल नज़दीकिया तो मिली..अब ये फ़िज़ा भी न रही पर शुक्र है तू नज़र आने लगी है..
-प्रशांत
3rd Jan 2020

Friday, May 8, 2020

दिल कुछ ऐसा पिघला दिया चंद अल्फाज़ो में... यकीन नहीं था की हो भी पायेगा इतने दबे जज़बातो में...
 ये बात कुछ और है की समझ न पाएंगे वो.... दबी बात कभी, कभी नज़रो से ओझल कभी जोड़ न पाए वो टूटे टूटे अल्फ़ाज़ मेरे..

Sometimes its hard to tell how much you love or sometime even tell that you love her...