Tuesday, October 20, 2015

Ghumnaam..

गुमनाम ही रहने दो, यही आबरू है अब  मेरी …
नाम मिला तो फिर ये आबरू खो जाएगी .... 

Tuesday, July 21, 2015

आशिक़ों को ना तो इमारतों की दरकार है और ना ही इबादतगाह की ,
तलाश होती है तो सिर्फ इश्क़ की इल्म की और इम्तिहान की.....

-prashant mathur

Wednesday, January 21, 2015

Raste..

Is rah tirahe aur chaurahe bhi mile..
shukra hai chalte rahe aur raste milte rahe..


इस राह तिराहे और चौराहे भी मिले
शुक्र है चलते रहे और रस्ते मिलते रहे।