न पूछ दिल गुरेज़ी का मेरे जब सलाह तुझे करता हु,सोचता हु जितना बहुत कम बयां करता हु..
यो रोकता हु खुद को की हर लफ्ज़ पर तेरी उम्मीद है मुझसे, और कोई खता न मुझसे हो जाये बस ये ख्याल रखता हु..
कुछ बन रहा है रिश्ता तुझ से ऐसा, न कोई मंज़िल न कोई मुस्तकबिल नहीं यहाँ, पर कुछ ऐसा है की फिर भी तेरी फ़िक्र करता हु..
दिन कुछ ऐसे गुजर जाता है पेशोपश में की किस किरदार में तुझसे मुलाकात करू, बस खुद बनके तुझसे बात करू हर वो मौका तलाश करता हु..
कुछ शुरू किये राब्ते तुझसे , पेशकश की वो सिलसिले बन जाये, उन सिलसिलो के हे बस नए आयाम बनाया करता हु..
चाहत है कुछ इस तरह की के में खुद उलझन में हु, सही गलत के बेनतीजा ताने बाने है बस उन्ही में गुज़र कुछ छोर ढूंढा करता हु..
चाहे दूर हे चली जाये तू और मेरी हसरते अधूरी रह जाये.. पर जहा तेरी राह मुक्कमल हो बस वही सलाह करता हु..
-प्रशांत 17 Jun 2020
यो रोकता हु खुद को की हर लफ्ज़ पर तेरी उम्मीद है मुझसे, और कोई खता न मुझसे हो जाये बस ये ख्याल रखता हु..
कुछ बन रहा है रिश्ता तुझ से ऐसा, न कोई मंज़िल न कोई मुस्तकबिल नहीं यहाँ, पर कुछ ऐसा है की फिर भी तेरी फ़िक्र करता हु..
दिन कुछ ऐसे गुजर जाता है पेशोपश में की किस किरदार में तुझसे मुलाकात करू, बस खुद बनके तुझसे बात करू हर वो मौका तलाश करता हु..
कुछ शुरू किये राब्ते तुझसे , पेशकश की वो सिलसिले बन जाये, उन सिलसिलो के हे बस नए आयाम बनाया करता हु..
चाहत है कुछ इस तरह की के में खुद उलझन में हु, सही गलत के बेनतीजा ताने बाने है बस उन्ही में गुज़र कुछ छोर ढूंढा करता हु..
चाहे दूर हे चली जाये तू और मेरी हसरते अधूरी रह जाये.. पर जहा तेरी राह मुक्कमल हो बस वही सलाह करता हु..
-प्रशांत 17 Jun 2020
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