न तुम उस पार न में इस पार, न सिर्फ मुझे जो फांसला था दरम्यान उसको भी है तेरा इंतेज़ार
पैमाने ही नहीं जाम को भी, जो हसरते थी साकी, वो भी मुन्तज़िर , बरक़रार नहीं बेक़रार है अब तेरे दीदार की ये प्यास..
-प्रशांत 27 July 2020
पैमाने ही नहीं जाम को भी, जो हसरते थी साकी, वो भी मुन्तज़िर , बरक़रार नहीं बेक़रार है अब तेरे दीदार की ये प्यास..
-प्रशांत 27 July 2020