shauq-e-shauqeen
Monday, November 2, 2020
नाउम्मीदगी
नाउम्मीदगी के साये है, घेरे हर ओर रह रह कर आते है.. मुकम्मल हाथ नहीं दीखते की थाम ले, बिला वजह बस रह रह कर ख्याल तेरे आते है.. प्रशांत माथुर 2 Nov 2020
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