Saturday, December 5, 2020

चलना था कुछ कदम ..

चलना था कुछ कदम और मंज़िल भी मुंतजऱ थी.. 
पर आसमान की ख्वाइशे ऐसी की सितारे गिनते रह गए.. 

 प्रशांत माथुर, 5 Dec 2020

No comments:

Post a Comment