Saturday, December 12, 2020

अर्ज़ है

अर्ज़ है ये नज़्म, तेरे दर पर गुस्ताख़ दस्तक की तरह.. 

फ़र्ज़ है तेरा की पूछे, कौन आया है... 


प्रशांत माथुर , 12  Dec 2020 

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