Tuesday, June 16, 2020

कुछ रिश्ता ये ऐसा बन रहा है

कुछ रिश्ता ये ऐसा बन रहा है तेरे मेरे बीच, में हैरान हु इसकी रफ़्तार से...
मुस्तक़बिल नहीं बनता कोई तेरे मेरे बीच..फिर भी शिकवा रहेगा तेरी रुस्वाई से...
कोई मंजिल नज़र आती नहीं, और ये सफर न हो ख़तम , है अजीब फिर भी गुरेज़ नहीं ऐसी ख्वाइश से...
देखता हु तुझे हसरत भर कर, कभी आह भर कर, दर्द से सना ये राज़ जज़्ब फिर भी करता हु मुस्कराहट से...
न जाने कैसी एक तरफ़ा मुहब्बत है, बेमुरव्वत सी लगती है, बस अर्ज़ है काबू में रहे ज़ज्बात इस दिल-ऐ-नादाँ से..

-प्रशांत 17 Jun 2020

जब सलाह तुझे करता हु

न पूछ दिल गुरेज़ी का मेरे जब सलाह तुझे करता हु,सोचता हु जितना बहुत कम बयां करता हु..

यो रोकता हु खुद को की हर लफ्ज़ पर तेरी उम्मीद है मुझसे, और कोई खता न मुझसे हो जाये बस ये ख्याल रखता हु..
कुछ बन रहा है रिश्ता तुझ से ऐसा, न कोई मंज़िल न कोई मुस्तकबिल नहीं यहाँ,  पर कुछ ऐसा है की फिर भी तेरी फ़िक्र करता हु..
दिन कुछ ऐसे गुजर जाता है पेशोपश में की किस किरदार में तुझसे मुलाकात करू, बस खुद बनके तुझसे बात करू हर वो मौका तलाश करता हु..
कुछ शुरू किये राब्ते तुझसे , पेशकश की वो सिलसिले बन जाये, उन सिलसिलो के हे बस नए आयाम बनाया करता हु..
चाहत है कुछ इस तरह की के में खुद उलझन में हु, सही गलत के बेनतीजा ताने बाने है बस उन्ही में गुज़र कुछ छोर ढूंढा करता हु.. 

चाहे दूर हे चली जाये तू और मेरी हसरते अधूरी रह जाये.. पर जहा तेरी राह मुक्कमल हो बस वही सलाह करता हु..

-प्रशांत  17 Jun 2020

Wednesday, June 10, 2020

राब्ता

तुझसे कुछ राब्ता है ऐसा की, हसरत हैं बहुत, पर बयां नहीं होती..
बोलने को तुझसे लफ्ज़ बहुत है फुर्सत भी है बहुत, पर जुर्रत नहीं होती..
-प्रशांत 11 Jun 2020

Sunday, June 7, 2020

आज शाम चाँद नहीं निकला...

कुछ मौसम इस तरह, की कल  शाम चाँद नहीं निकला, में मुंतज़र बहुत देर,
कुछ नाराज़ है ये दिल, पर तेरी खता माफ़, कल  तू नहीं निकली , आज  में नहीं निकला..

-प्रशांत 7th Jun 2020

Thursday, June 4, 2020

इस पार में वो उस पार

इस पार में वो उस पार, दरम्यान कुछ नहीं बस एक खुशनुमा अहसास
जाम दर जाम होते रहे ख़तम, न हुई तो बस तेरे दीदार की ये प्यास....
-प्रशांत 
4th June 2020

Wednesday, June 3, 2020

ज़िन्दगी...

यु तलाश ज़िन्दगी तेरी करते रहे.. भूल ही  गए की तुझे ही जीते हैं रहे..
यु मुक्कमल जिंदगी तुझे करते रहे.. भूल ही गए की  मुक्कमल खुद ही होते हैं रहे..
-प्रशांत
4th June 2020

Tuesday, June 2, 2020

तुझसे नज़दीकियाँ....

तुझसे नज़दीकियाँ.... 

कदम उठे उस राह जहा तेरे कदमो के निशा मिले..अब निशा न रहे पर फ़िज़ा में तेरी खुशबु सी आने लगी है..
खो गई तुझ तक राहे पर खुश है दिल नज़दीकिया तो मिली..अब ये फ़िज़ा भी न रही पर शुक्र है तू नज़र आने लगी है..
-प्रशांत
3rd Jan 2020