कुछ मौसम इस तरह, की कल शाम चाँद नहीं निकला, में मुंतज़र बहुत देर,
कुछ नाराज़ है ये दिल, पर तेरी खता माफ़, कल तू नहीं निकली , आज में नहीं निकला..
-प्रशांत 7th Jun 2020
कुछ नाराज़ है ये दिल, पर तेरी खता माफ़, कल तू नहीं निकली , आज में नहीं निकला..
-प्रशांत 7th Jun 2020
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